लाल किताब के अचूक उपाय
1. यदि किसी व्यक्ति को लड़ाई झगड़े में मुकदमें बाजी में और किसी कारण मान हानि का खतरा हो शनि किसी भी खाने में बैठा हो तो सरसों का तेल मिट्टी के लोटे में भरकर किसी खड़े गन्दे पानी में डुबाएं। फौरन फल की प्राप्ति होगी। ऐसा आवश्यक नहीं है कि शनि खाना नं 6 में हो तो ही यह उपाय करना है। मैंने सैकड़ों जातकों को ये बताया कि ये उपाय करना है जिन का शनि खाना नं 6 में नहीं था तब भी उनको फौरन फायदा हुआ है।
2. जब भी किसी व्यक्ति को कोई भी टेन्शन हो और कुछ भी सूझ न रहा हो तो 21 नारियल चलते पानी में, साफ पानी में गंगा यमुना, नहर में बुधवार को डाले अति उत्तम लाभ होगा।
3. यदि किसी व्यक्ति को बारबार चोट लगती है या दुर्घटना होती है। तो 11 किलो कनक ढाई किलो गुड़ के साथ मांगने वाले को दान में दे दें बहुत लाभकारी है। दान रविवार या मंगलवार को दें।
4. यदि किसी गर्भवती महिला को बच्चा होने के समय डाक्टर ने कहा कि आपरेशन से बच्चा होगा और सातवां माह हो तो वजन के बराबर जौं चलते पानी में वीरवार को डालें और उससे अगले हफ्ते मंगलवार को 80 किलो गौऊओं को खिलाएं और लाल धागा कमर पर बांधे ये गुड़ गौशाला में आवश्यक है बच्चा होने से पहले कम से कम 30 दिन का समय होना चाहिए। ये उपाय अवश्य मददगार होगा।
5. यदि किसी की हड्डी टूट जाए तो उसके लिए उपाय है
कनक को भून कर और गुड़ की चाश्नी बनाकर लड्डू बना लें कनक गुड़ बराबर मात्रा में होने चाहिए और वे लड्डू बन्दरों को खिलाएं बहुत जल्द आराम आएगा। यदि डाक्टर ने कहा कि आपको 100 दिन में आराम आएगा तो आपको 45 दिन में ही आराम आ जाएगा। यह उपाय भी बहुत लोगों के ऊपर आजमाया हुआ है। ये उपाय मंगलवार या रविवार को करें।
6. यदि किसी को कोई बीमारी हो और बारबार हो रही हो तो सेंधा नमक पत्थर वाला 80 किलो गोशाला में गऊओं को खिलाएं। और शनिवार को तिल्ले वाला झाडू किसी धर्म स्थान पर दे या किसी गरीब मांगने वाले को दें यदि किसी कारण 80 किलो नमक एक साथ नहीं खिला सकता तो हर शनिवार थोड़ा सा नमक गाय को देते रहें। यदि मंगल अशुभ हों तो चार मीठे पान गुलकन्द वाले किसी को खिलाएं मंगलवार को ।
7. यदि बारबार कोई काम न बन रहा हो और प्रतीत हो किसी की नजर लग रही है तो लाल मुंह वाला बन्दर मिट्टी वाला घर आफिस फैक्टरी दुकान आदि में रखें और बन्दर का मुंह बाहर की तरफ होना चाहिए यानि के दरवाजा की तरफ।
यदि आप को लगे आपका कार्य किसी ने बांध रखा है तो आप रात को सोने से पहले और खाना खाने के बाद लोबान, गुगुल, हरमल आटे का छान और किसी भी चौराहे की मिट्टी एक मिट्टी के बरतन में रखकर जलाएं और उसका धुआं सारे घर में करे। फिर जब जल कर ठंडा हो जाए तो उसकी राख मिट्टी के बर्तन के साथ किसी चौराहे पर एक किनारे रख दें ये उपाय लगातार तीन दिन करें शनि और रविवार को सामान तीनों दिन अलग-अलग खरीदें।
8. हरिद्वार जाकर स्नान करें
स्नान करने की विधि
घर से सामान लेकर जाएं। 1. एक नारियल पानी वाला 2. सवा पाव गुड़ 3. एक मुट्ठी चावल 4. एक मुट्ठी आटा 5. 7 पताशे खण्डित न हों 6. 7 सिक्के एक रूपए वाले 7. मिठाई का डिब्बा।
कपड़े समेत स्नान करें जब तक आपका मन करे। स्नान करने के अंतिम समय नारियल अपने सर पर रखें और जिस तरफ से पानी का बहाव आ रहा हो उस तरफ मुंह करके तीन बार डुबकी लगाएं या तीन बार जितना नीचे बैठ सकें बैठे फिर नारियल को अपने पीछे की तरफ डाल दें। और बाहर आ जाएं। पीछे की तरफ नहीं देखेंगे।
कपड़े न निचोड़े कपड़े जहां पर एक बार रख दें वहीं पर पड़े रहने दें। उन्हें पैर से या किसी और वस्तु से इधर उधर न करें उन कपड़ों को वहीं छोड़ दें वापस नहीं लाएं।
फिर नए वस्त्र पहन कर गुड़ पानी में डाले फिर पताशे, फिर आटा फिर चावल फिर मिठाई से मुंह मीठा कर लें और सात सिक्के और बाकी की मिठाई गरीबों में बांट दें।
जब वापस घर आएं घर के अंदर जाने से पहले अपना मुंह मीठा कर लें ये उपाय बहुत लोगों पर कारगर मददगार साबित हुआ है।
9. यदि आप का मकान नहीं बन पा रहा हो तो या रूकावट आ रही हो तो आप आटे और बेसन की चार रोटियां बनाकर गाय को खिलाएं। ये ख्याल रखें आटा और बेसन बराबर मात्रा में होने चाहिए। और साथ में इस मंत्र का जाप करें। ग्यारह माला रोज करें। ॐ नमः श्री वराहाय धरन्यु द्वारणाय स्वाहा ।
10. सवा किलो काले चने मसाले वाले बनाकर 43 शनिवार गरीबों में बांटे चने सरसों के तेल में बनाएं। आमचूर धनिया पाउडर अवश्य डालें। ये उपाय व्यापार, मकान और वाहन के लिए बहुत अधिक कारगर है।
11.
- गाय को मीठी रोटी रोज खिलाएं जो सबसे पहले बनी हों।
- कौओं को बेसन के पकौड़े सरसों के तेल के बने हुए रोज खिलाएं।
- कुत्ते को रोटी रोज डाले जो भी ये तीनों उपाय रोज करेगा उसे अपनी जिन्दगी में जो परेशानी आएगी फौरन हल हो जाएगी।
इस उपाय के साथ कोई और उपाय भी कर सकते हैं उसका कोई वहम नहीं है।
12. चोरियां या वैसे ही धनहानि बारबार हो रही हो थोड़े से जौ लेकर घर के अंधेरी जगह पर किसी कपड़े में बांध कर उस पर भारी वजन रख दें।
13. यदि किसी के बच्चें की शादी में रूकावट हो तो माता-पिता दोनो 2 केले छोटे से केले के पत्ते पर रखकर मन्दिर में लक्ष्मी नारायण की मूर्ति पर रखकर प्रार्थना करें लगातार 108 दिन तक ।
14. यदि किसी की लड़की की शादी में रूकावट आ रही हो तो सात रंग की साड़ियां और ब्लाउज पेटी कोट और एक साड़ी के साथ श्रंगार का सामान लेकर मन्दिर में माता की मूर्ति को पहनाएं और बुधवार को बाकी की साड़ियां मन्दिर में दे दें। यदि सात साड़ियां नहीं दे सकते तो एक साड़ी का पूरा सेट दें। बाकी के 6 रंग के ब्लाउज दे दें। और लड़की एक रोटी मीठी एक नमक वाली सुबह और शाम को दोनो समय गाय को खिलाए 43 दिन तक लगातार। कोई वहम् न करें।
15. कभी भी कोई नए काम पर जा रहा हों जो नौकरी के साक्षात्कार के लिए जा रहा हो तो 15 केले मन्दिर में रखकर जाएं।
16. यदि बच्चे पढ़ाई खूब करते हैं लेकिन अंक कम आते हैं या पढ़ाई में दिल नहीं लगता हो तो एक बार 9 दर्जन केले वीरवार को धर्मस्थान पर रखें या गरीब बच्चों में बांटे बच्चे के हाथों से। उसके बाद हर माह पहले वीरवार को चार दर्जन केले भी धर्मस्थान पर रखें या गरीब बच्चों में बांटे इस उपाय से अवश्य लाभ होगा।
17. यदि राहू अशुभ हो तो पूर्णिमा के पूर्णिमा 13 पूर्णिमा लगातार हरिद्वार जाकर गंगा में स्नान करें और एक नारियल गंगा जी में प्रवाह करें शतप्रतिशत लाभ होगा। राहू शैतानी करना बंद कर देगा। ये ख्याल रहे कि स्नान करने से पहले कुछ खाया न हो। इसलिए स्नान सुबह सुबह करें।
18. अगर व्यापार का नाश हो रहा हो तो
- दुर्गा का पाठ कराएं
- तोते को चूरी खिलाएं फिर उड़ा दें बुधवार के दिन
- सफेद कबूतर को मूंग की दाल रात को भिगोकर बुधवार सुबह डालें।
19. किसी की लड़की की शादी न हो रही हो तो एक मिट्टी की लड़के और लड़की की मूर्ति लेकर अलग-अलग हो या एक साथ बनी हो को बराबर मात्रा में हल्दी, आटा, चावल का आटा लेकर लेप लगा कर एक लकड़ी का पटरा लेकर उसके नीचे रखें और लड़की को पटरे पर कुछ देर बिठाएं बैठते समय मन में यही विचार होने चाहिए कि मेरी शादी जल्दी हो जाए ये उपाय निर्जला एकादशी के दिन करे उसके बाद 6 एकादशी और करें।
20. यदि आप शनि महाराज से परेशान हैं तो अमावस्या के अमावस्या लगातार 17 बार गंगा स्नान करें दोपहर को तीन बजे के आसपास और स्नान करने के बाद कुछ बादाम गंगा जी में प्रवाह करें।
ज्ञानवर्धक बातें
1. कौन ऐसा बुद्धिमान है जो सभी चीजों को पूर्णतः जानता हो? अतएव अपने विचारों पर अधिक निर्भर रहो। परंतु दूसरों के विचार को भी सुनने के लिए तैयार रहो।
2. दूसरों को दुख देने, बड़ों का अपमान करने से चित्त अप्रसन्न रहता है। गुरु पूज्य देव की निन्दा करना नीचपन है, इसका सदा त्याग करो।
3. यदि सुख चाहता है, तो विद्या छोड़ दे, यदि विद्या चाहता है। तो सुख छोड़ दे, क्योंकि सुख चाहने वाले आलसी को विद्या कैसी ? विद्या चाहने वाले को सुख (आलस्य) कैसे हो सकता है।
4. कोयल की शोभा स्वर से, स्त्री की शोभा लज्जा, सहनशीलता, नम्रता, सेवा से, धन की दान से, घर की बुजुर्गो की सेवा से, मुख की सत्य बोलने से, हृदय की सुन्दर विचारों से, सिर की शोभा माता-पिता, गुरु साधु बड़ों के चरणों में झुकने से होती है।
5. लोभी को धन से, घमन्डी को हाथ जोड़कर, मूर्ख को उसके अनुसार बर्ताव से और पण्डित सज्जन को सच्चाई से वश में करना चाहिए।
6. हे मनुष्य जोश में आकर इतना जोश-खरोश न दिखा, इस दुनिया में बहुत से दरिया चढ़-चढ़कर उतर गए-कितने ही बाग लगे और सूख गए।
7. जो जितना छोटा है, वह उतना ही घमण्डी और उछलकर चलने वाला है, जो जितना गंभीर और निरभिमानी है, नदी-नाले थोड़े से जल से इतरा उठते है, किन्तु सागर जिसमें अनन्त जल भरा है, गंभीर रहता है।
8. हमें अधिक शान्ति मिलती यदि हम आपने को दूसरों के काम और वचनों में उलझाए न होते, उन वस्तुओं में न फंसे होते जिनसे हमारा कोई संबंध नहीं है।
9. सच तो यह है कि शरीर, बिजली की चमक और बादल की छाया की तरह चंचल और अस्थिर है। जिस दिन जन्म लिया, उसी दिन मौत पीछे पड़ गई, अब वह अपना समय देखती है और समय पूर्ण होते ही प्राणी को नष्ट कर देगी।
10. किसी पहाड़ से गिर जाना परंतु किसी की नजरों में मत गिरना ।
11. झूठ भी अच्छा यदि वह प्रेम से जन्मा हो, सत्य बुरा है अगर वह केवल चोट पहुँचाने के लिए बोला गया हो।

नमस्कार । मेरा नाम अजय शर्मा है। मैं इस ब्लाग का लेखक और ज्योतिष विशेषज्ञ हूँ । अगर आप अपनी जन्मपत्री मुझे दिखाना चाहते हैं या कोई परामर्श चाहते है तो मुझे मेरे मोबाईल नम्बर (+91) 7234 92 3855 पर सम्पर्क कर सकते हैं । परामर्श शुल्क 251 रु है। पेमेंट आप नीचे दिये QR CODE को स्कैन कर के कर सकते हैं। कुंडली दिखाने के लिये पेमेंट के स्क्रीन शॉट के साथ जन्म समय और स्थान का विवरण 7234 92 3855 पर वाट्सप करें । धन्यवाद ।

12. यदि मनुष्य केवल प्रतीक्षा करे तो भी हर वस्तु प्राप्त हो जाती है।
13. जिससे आप जितना ज्यादा चिपकते हो वही चीज आपके लिए दुःख का कारण बनेगी।
14. जो लोग मादक द्रव्यों की तरफ भाग रहें हैं, उन्हें असल में ध्यान की तलाश है।
15. एक ठीक संतुलित व्यक्ति किसी चीज के विरूद्ध नहीं होता और न ही किसी के पक्ष में होता है।
16. जब कोई देश इतने सारे संतो को पैदा करता है, तो उसे उतनी ही संख्या में पापी पैदा करने पड़ते हैं। वरना संतुलन नहीं रहेगा। एक बुद्ध होने के लिए लाखों पापी चाहिए।
17. जितना तुम स्वयं को जानते हो उतना ही तुम दूसरों को जान सकते हो। उससे रत्ती भर ज्यादा नहीं।
18. जो आदमी अपनी आवश्यकताओं को काटकर अपनी इच्छाओं की पूर्ति करता है। वह दुःखी रहता है।
19. पहाड़ से गिर जाओ लेकिन किसी की नजरों में न गिरो ।
20. प्रकाश को एक ही फूंक में भगा सकते हो। लेकिन अंधेरा को मार कर नहीं भगा सकते।
21. परमात्मा पृथ्वी की कोई भाषा नहीं समझता। परमात्मा केवल प्रेम की भाषा ही समझता है।
22. दुख को अगर दबाए तो बढ़ता है दुख को अगर प्रकट करें तो घटता है।
23. आनंद को दबाए तो घटता है आनंद को अगर प्रकट करे तो बढ़ता है।
24. पुरूष चलता है तो बुद्धि से, विचार से, तर्क से। स्त्री चलती है भाव से, कल्पना से स्वप्न से ।
25. भला करना बहुत महंगा पड़ता है और दया करनी बहुत मंहगी पड़ती है।
26. नेकी ही मुसीबत झेलती है।
27. सम्मानित आदमी ही बदनाम होता है।
28. जो आदमी अपनी जितनी गलती मानता जाएगा। वह उतना
ही सही होता जाएगा।
29. सामूहिक पूजा नहीं होती। सामूहिक कीर्तन होता है।
30. असल में जिनमें बदलने की क्षमता होती है वे ही जीवित रहते हैं अन्यथा मर जाते हैं।
31. जिन्दगी में विश्राम बहुत मुश्किल है। मंजिल कभी नहीं मिलती बल्कि वह खुद मंजिल बन जाता है।
32. सत्य को वही जानेगा जिसकी कोई शर्त नहीं है।
33. जिसके हम मालिक हैं, उसे हम बदल सकतें हैं, जिससे आप लड़ते हैं, उसके आप मालिक कभी नहीं बन सकते है।
34. अशांति पैदा होती है, अस्वीकार की वृत्ति से।
35. सच भी एक अति है और झूठ भी एक अति है। सपना ठीक मध्य है। संसार को सच कहना भी एक अति है और झूठ कहना भी एक अति है। संसार को एक सपना कहना ठीक मध्य है।
36. दूध में मधुरता तब तक होती है जब तक सर्प उसे नहीं छूता । पुरुष में गुण भी उसी समय तक रहतें हैं जब तक कि तृष्णा का स्पर्श नहीं होता। अतः बुद्धिमानों । अनित्य नाशवान् विषयों से दूर रहो, क्योंकि इनमें जरा भी सुख नहीं ।
37. मनुष्य जितना अधिक नम्र होगा, जितना अधिक परमात्मा में उसका विश्वास होगा, उतना ही अधिक वह अपने कार्यों में कुशल होगा और उतनी ही अधिक शान्ति और हार्दिक तुष्टि को भोगेगा।
38. अभिमानी और लोभी को कभी शान्ति नहीं मिल सकती। दीन और विनम्र हृदय पूर्ण शान्ति में सदा साथ रहता है।
39. यदि तुम्हारे पास धन हो तो भी उस पर गर्व न करो, बलशाली मित्रों पर गर्व न करो, पंरतु गर्व करो उस परमात्मा पर जो तुम्हें सब कुछ देता है और जो तुम्हें स्वयं अपना बना लेना चाहता है।
40. मांस खाने वालों, मदिरा पीने वालों, निरक्षर, मूर्खो इन पुरूष रूपधारी पशुओं के भार से पृथ्वी दुःखी रहती है। मूर्ख का हृदय सूना होता है। दरिद्रता सब से सूनी और कष्टकर है।
41. यह अच्छा है कि कभी-कभी हम कठिनाई और कष्टों में पड़ जाते हैं, क्योंकि उनसे प्रायः हम अपने अन्तर में प्रवेश करते हैं। और यह सोचते हैं कि हमारा यहां का जीवन निर्वासन का है और ऐसी दशा में हमें किसी भी सांसारिक वस्तु में विश्वास नहीं रखना चाहिए।
42. अपने सत्कार्यों पर अभिमान करो, क्योंकि मनुष्य का न्याय परमात्मा के न्याय से सर्वथा भिन्न है, और प्रायः जो उसे (मनुष्य का) सुखद प्रतीत होता है, वही परमात्मा को अरूचिकर हो जाता है।
43. माता के समान कोई तीर्थ, रक्षक, सरोवर, देवता नहीं है माता की सेवा करने वाला तर जाता है। पिता, गुरू, संत महात्मा भी तीर्थ हैं। तीर्थ वह है जो तार देता है।
44. आंख के समाने मीठी-मीठी बातें करने वाले परन्तु आंख के पीछे होने पर सभी कार्य नष्ट करने वाले मित्र को कंठ तक बाहर से दूध और अंदर जहर भरे घड़े की तरह छोड़ देना चाहिए।
45. जैसे दीपक अंधकार को खाता है और कालिख छोड़ता है इसी तरह मनुष्य जिस तरह, जिस हाथ का पका हुआ अन्न खाता है उसकी वैसी ही बुद्धि, विचार संस्कार संतान बनती है।
46. सोच करने से कोई लाभ नहीं है, सोच करने वाला केवल दुःख ही भोगता है। जो मनुष्य सुख और दुःख दोनो को त्याग देता है। जो ज्ञान से तृप्त है और बुद्धिमान है, वही सुख पाता है।
47. सदा प्रसन्न रहने का उपाय है दूसरों के गुण देखो त्रुटियों नहीं, सदाचारी बनो दुराचारी नहीं, दानी बनो कृपण नहीं, दयालु बनो कठोर नहीं, सहनशील बनो क्रोधी नहीं, निष्कपट बनो कपटी नहीं, त्यागी बनो लोभी नहीं।
48. अपनी बड़ाई स्वयं मत करो इससे दूसरों की दृष्टि में गिर जाओगे। बेईमान का दिमाग और मूर्ख की जिहव्वा भयानक है इनसे बचो। सांप के दांत तथा बिच्छू की पूंछ में विष होता है किन्तु दुष्ट के अंग-अंग में विष समाया होता है।
49. मेरा अहंकार मुझे स्वयं से मिलने नहीं देता। जब मन शुद्ध हो जाता है वह अपने आप गिर जाता है।
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